करीमुद्दीनपुर बना गौ तस्करों का सेफ जोन, वायरल वीडियो ने खोली पोल

गाजीपुर। करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र में गौ तस्करी को लेकर लगातार सामने आ रहे वीडियो और स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले करीब एक महीने से सोशल मीडिया पर पिकअप वाहनों के जरिए कथित तौर पर गौवंश ले जाए जाने के वीडियो वायरल होने का दावा किया जा रहा है। इन वीडियो को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र से जुड़े लट्ठूडीह-कोटवा मार्ग और आसपास का इलाका कथित गौ तस्करी के लिए संवेदनशील बनता जा रहा है। दावा है कि रात के अंधेरे में बाहरी क्षेत्रों से वाहनों के जरिए गौवंश लाए जाते हैं और इसके बाद छोटे वाहनों में उन्हें आगे भेजा जाता है।

तीन थाना क्षेत्रों की सीमा बनी संवेदनशील कड़ी…..

करीमुद्दीनपुर, भांवरकोल और बलिया जनपद के नरही थाना क्षेत्र की सीमाएं जिस क्षेत्र में आपस में जुड़ती हैं, वहां की भौगोलिक स्थिति को लेकर भी स्थानीय लोग चिंता जता रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहन करीमुद्दीनपुर क्षेत्र से निकलकर लट्ठूडीह-कोटवा मार्ग के रास्ते गोड़उर लालूपुर माफी होते हुए भांवरकोल क्षेत्र की ओर सियाड़ी होते हुए तथा शाहपुर उर्फ माधोपुर के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के अंडरपास पहुंचते हैं। वहां से ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के जरिए बलिया के नरही थाना क्षेत्र में प्रवेश कर आगे भरौली गोलंबर के रास्ते बक्सर बिहार सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। स्थानीय लोगों का दावा करते हैं कि इस खेल में तस्करों का बड़ा नेटवर्क काम करता है।

 

बाहरी जिलों से खेप आने का दावा…

सूत्रों के अनुसार, रसड़ा, बलिया, आजमगढ़, मिर्जापुर, मेरठ और हरियाणा समेत अन्य स्थानों से कथित रूप से गौवंश की बड़ी खेप रात के समय करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाए जाने की चर्चा है।

दावा है कि बड़े वाहनों से कथित रूप से लाई गई खेप को स्थानीय स्तर पर पिकअप वाहनों में स्थानांतरित किया जाता है। इसके बाद एक या दो पशुओं को लादकर छोटे वाहन अलग-अलग रास्तों से आगे बढ़ते हैं।

यदि यह दावा जांच में सही साबित होता है तो यह केवल एक स्थान पर होने वाली घटना नहीं, बल्कि कई करीमुद्दीनपुर, भांवरकोल, नरही थाना क्षेत्रों से जुड़ा पूरा नेटवर्क होने की ओर इशारा करेगा।

वायरल वीडियो ने उठाए कई सवाल…..

सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे वीडियो में लट्ठूडीह-कोटवा मार्ग पर सुबह के समय कई पिकअप वाहनों के तेजी से गुजरने की बात सामने आ रही है। इन्हीं वीडियो को आधार बनाकर स्थानीय लोग गौ तस्करी की आशंका जता रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रात के समय लगातार संदिग्ध वाहनों की आवाजाही हो रही है तो पुलिस की रात्रि गश्त और चेकिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या संवेदनशील मार्गों पर नियमित वाहन चेकिंग होती है? क्या संदिग्ध पिकअप वाहनों की पहचान और सत्यापन किया जा रहा है?

 

गौ तस्करों कि गाड़ी ग्रामीण पकड़ते हैं तो होती है कार्रवाई….

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई मामलों में ग्रामीणों द्वारा संदिग्ध वाहनों को रोकने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। कुछ मामलों में वाहन रास्ते में कीचड़ में फंस जाने अथवा सुबह हो जाने के कारण पुलिस की कार्रवाई सामने आने की बात भी कही जा रही है।

यदि ऐसा है तो पुलिस की सक्रियता को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाजिमी है कि कार्रवाई पहले क्यों नहीं होती? रात के समय संवेदनशील मार्गों पर पुलिस की मौजूदगी और निगरानी कितनी है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि कथित तस्करी के पूरे खेल में स्थानीय स्तर पर कुछ लोग सक्रिय हैं, जो बाहरी वाहनों को रास्ते और सुरक्षित आवागमन की जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

मुहम्मदाबाद क्षेत्राधिकारी को जांच कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश…

वायरल वीडियो और सामने आई शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए विभाग ने मुहम्मदाबाद क्षेत्राधिकारी सुधाकर पांडेय को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अब स्थानीय पुलिस की भूमिका और क्षेत्र में रात के समय होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र में थाना प्रभारी बदलने के बाद भी यदि कथित गौ तस्करी की शिकायतें और वीडियो सामने आ रहे हैं तो पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है। उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संवेदनशील मार्गों पर रात्रि गश्त, वाहन चेकिंग और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी प्रभावी तरीके से हो।

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