गाजीपुर। समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी को शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मामलों में अदालत से राहत मिलने के बाद उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सांसद का कहना है कि दशकों पुराने शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावलियां सरकारी विभाग के रिकॉर्ड रूम में रहती हैं। ऐसे में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
अफजाल अंसारी के अनुसार, उनके शस्त्र लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने को लेकर तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें आपराधिक धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि मोहम्मदाबाद थाने से जुड़े शस्त्र लाइसेंस को तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर वर्ष 1983 में सुरक्षा के लिए जारी किया गया था। इसके बाद लाइसेंस का समय-समय पर नवीनीकरण होता रहा और इसी आधार पर हथियारों की खरीद-बिक्री भी हुई।
सांसद ने बताया कि वर्ष 2015 में शस्त्र लाइसेंसों के कंप्यूटरीकरण के दौरान उनके लाइसेंस की आईडी भी जनरेट हुई। उनका सवाल है कि जब लाइसेंस सरकारी प्रक्रिया के तहत वर्षों तक संचालित होता रहा और उसका कंप्यूटरीकरण भी हुआ, तो पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा कैसे बनता है।
उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी सहअभियुक्त बनाया गया है। साथ ही उन्होंने जांच में नामजद कुछ लोगों की मृत्यु हो जाने का भी उल्लेख करते हुए जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
अफजाल अंसारी ने गैंगस्टर एक्ट के तहत पूर्व में कुर्क की गई अपनी और परिवार की संपत्तियों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अदालत के आदेश के बाद कई संपत्तियों को कुर्की से मुक्त किया गया है। हालांकि, कुर्की के दौरान हुए कथित नुकसान की भरपाई के लिए अलग कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।
सांसद ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कार्रवाई पूर्वाग्रह और राजनीतिक साजिश का परिणाम है। हालांकि, ये उनके आरोप हैं और इस संबंध में पुलिस-प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और आगे की सुनवाई में वह अपना पक्ष रखेंगे। अफजाल अंसारी ने कहा कि अदालत में यह स्पष्ट होगा कि सरकारी रिकॉर्ड आखिरी बार किसके पास था और उसके गायब होने की जिम्मेदारी किसकी थी।










