शेरपुर खुर्द में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग से गूंजा कथा पांडाल, भक्त हुए भाव-विभोर

संवाददाता:- अजय कुमार यादव

भांवरकोल/गाजीपुर। भांवरकोल क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गांव में आयोजित नौ दिवसीय महामृत्युंजय महायज्ञ के तीसरे दिन श्रीराम कथा में वृन्दावन धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक वृन्दावन दास जी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथावाचक ने कहा कि माता पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं और भगवान शिव विश्वास के प्रतीक। श्रद्धा और विश्वास के संगम से ही जीवन में राम कथा का वास्तविक अर्थ समझ में आता है। उन्होंने बताया कि श्रीराम कथा मनुष्य को धर्म, भक्ति और संकल्प की शक्ति प्रदान करती है तथा जीवन को सही दिशा देती है।

उन्होंने शिव-पार्वती विवाह को अत्यंत मंगलकारी बताते हुए कहा कि जो भी श्रद्धा भाव से इस प्रसंग को सुनता है, उसके मनोरथ पूर्ण होते हैं। भोलेनाथ दयालु और कृपालु हैं, जो क्षण भर में भक्तों के पापों का नाश कर कल्याण करते हैं।

कथा में पर्वतराज हिमालय की तपस्या, माता पार्वती के अवतरण, महर्षि नारद के आगमन और शिव विवाह के अद्भुत प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। नंदी पर सवार भगवान शिव जब भूत-पिशाचों के साथ बारात लेकर पहुंचे तो पर्वतराज और परिजन आश्चर्यचकित रह गए, किंतु माता पार्वती ने हर्षपूर्वक उन्हें पति रूप में स्वीकार किया। वरमाला के समय देवताओं ने पुष्पवर्षा की और मंगल गीतों से वातावरण गूंज उठा।

इस पावन अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती जी महाराज, यज्ञाचार्य गोवर्धन शर्मा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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