संवाददाता:- अजय कुमार यादव
भांवरकोल (गाजीपुर)। क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गांव स्थित महावीर मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय महामृत्युंजय यज्ञ के चौथे दिन रविवार को यज्ञशाला की परिक्रमा के लिए सैकड़ों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से देर रात तक परिक्रमा का क्रम चलता रहा। हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। परिक्रमा के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। महायज्ञ में चल रहे भंडारे में प्रतिदिन हजारों लोग प्रसाद पा रहे हैं।
यज्ञाध्यक्ष एवं राजगुरु मठ के पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी महाराज ने युवा नेतृत्व निर्माण को लेकर विशेष गोष्ठी आयोजित कराई। गोष्ठी में युवाओं में आत्मविश्वास, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक विकास और राष्ट्र निर्माण हेतु नेतृत्व कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया। युवाओं को सामाजिक मुद्दों पर खुलकर विचार रखने और स्वैच्छिक सेवा कार्यों के माध्यम से जिम्मेदारी का बोध कराने का संदेश दिया गया।

अपने संबोधन में स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म में पुरुषार्थ के चार प्रमुख लक्ष्य—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—जीवन को संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाते हैं। ये मनुष्य को नैतिक जीवन जीते हुए समृद्धि और सुख प्राप्त करने तथा अंततः आध्यात्मिक मुक्ति की ओर अग्रसर करते हैं।
यज्ञ में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारे वृंदावन महाराज जी ने श्रीराम जन्मोत्सव का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की स्थापना के लिए भगवान अवतार लेते हैं। भगवान राम के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि अयोध्या में शुभ संकेत प्रकट होने लगे थे और प्रभु श्रीराम के जन्म के साथ ही पूरी नगरी हर्षोल्लास से भर उठी थी।











