गाजीपुर/भांवरकोल। कभी-कभी इंसानियत ऐसे चमत्कार कर देती है, जिसकी उम्मीद भी टूट चुकी होती है। ऐसा ही भावुक कर देने वाला मामला बलिया और गाजीपुर से सामने आया, जहां आठ महीने से लापता मूकबधिर युवक आखिरकार अपने परिवार से मिल गया। बेटे को सामने देखकर पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
बलिया जनपद के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के पिपरपाती गांव निवासी विशाल वर्मा, पुत्र रामाश्रय वर्मा, 3 दिसंबर 2025 को काला जैकेट, नीली जींस और टोपी पहनकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने हर संभव प्रयास किया, रिश्तेदारों और परिचितों के यहां खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में बांसडीह रोड थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। समय बीतता गया और परिवार की उम्मीदें भी लगभग खत्म होने लगीं।
इसी बीच आठ महिने बाद 5 अगस्त 2026 को गुमशुदा विशाल करीब 65 किलोमीटर दूर गाजीपुर के भांवरकोल थाना क्षेत्र स्थित श्रीपुर मुड़ेरा बुजुर्ग चट्टी पर भटकते हुए पहुंच गया। मूकबधिर होने के कारण वह अपना नाम और पता किसी को नहीं बता पा रहा था। स्थानीय लोगों ने जब उसके हाथ पर बने टैटू को ध्यान से देखा तो उस पर विशाल वर्मा और पिपरपाती लिखा मिला।
उसी समय चट्टी पर मौजूद सहज जन सेवा केंद्र संचालक शेषनाथ राजभर तथा खरडीहा निवासी गोलू वर्मा ने मानवता का परिचय देते हुए युवक के परिजनों तक पहुंचने का प्रयास शुरू किया। गोलू वर्मा ने टैटू में लिखे गांव के नाम के आधार पर अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया। जानकारी मिलते ही पता चला कि यह वही युवक है, जिसकी कई महीनों से तलाश की जा रही थी।
रिश्तेदारों ने तत्काल विशाल के पिता रामाश्रय वर्मा को सूचना दी। गुरुवार सुबह पिता श्रीपुर मुड़ेरा बुजुर्ग पहुंचे। आठ महीने बाद अपने बेटे को सकुशल देखकर उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने वहां मौजूद ग्रामीणों, और गोलू वर्मा का भावुक होकर आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्हें अब उम्मीद नहीं थी कि उनका बेटा कभी वापस मिलेगा।
यह घटना साबित करती है कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनकी संवेदनशीलता और मानवता किसी बिछड़े परिवार की खुशियां लौटा सकती है।










