भांवरकोल (गाजीपुर)। विकासखंड भांवरकोल के लोचाईन गांव में किसानों ने बरसाती मिर्च की खेती के लिए नर्सरी तैयार करना शुरू कर दिया है। किसान उन्नत किस्मों के बीजों की बुवाई कर बेहतर उत्पादन की उम्मीद जता रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी उपज के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन और वैज्ञानिक विधि से नर्सरी तैयार करना बेहद जरूरी है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अवनीश राय ने बताया कि AK-47, 2132, 1049, 7410 तथा इंदु मिर्च जैसी उन्नत किस्में अपने तीखेपन, गुणवत्तापूर्ण फल और अधिक उत्पादन के लिए किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 600 ग्राम बीज से एक बीघा क्षेत्र की खेती की जा सकती है।
डॉ. राय के अनुसार बरसाती मिर्च की नर्सरी मई-जून में तैयार की जाती है, जबकि ठंड के मौसम की फसल के लिए जुलाई-अगस्त में बीज डाला जाता है। बीज बोने से पहले 3 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करना चाहिए। इसके बाद ट्राइकोडर्मा से उपचारित करने पर पौधों को फफूंद जनित रोगों से सुरक्षा मिलती है।
उन्होंने बताया कि बीजों को सीधे खेत में बोने के बजाय कोकोपीट और वर्मीकम्पोस्ट से भरी सीडलिंग ट्रे में उगाना अधिक लाभकारी होता है। लगभग 25 से 30 दिनों में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। वर्तमान समय में कई जिलों में हाईटेक नर्सरियों की सुविधा उपलब्ध है, जहां से किसान 1 से 2 रुपये प्रति पौधा की दर से स्वस्थ पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों के प्रयोग से मिर्च की खेती किसानों के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित हो सकती है। उचित प्रबंधन के साथ एक एकड़ क्षेत्र में 200 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर लाखों रुपये की आय अर्जित की जा सकती है।










