कमलेश बिंद एनकाउंटर पर मंत्री संजय निषाद ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

गाजीपुर। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने गाजीपुर के चर्चित विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश बिंद के पुलिस एनकाउंटर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शनिवार को लखनऊ स्थित विक्रमादित्य मार्ग आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती, लेकिन किसी भी आरोपी को कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार प्राप्त है।

डॉ. निषाद ने कहा कि कमलेश बिंद इस मामले का मुख्य आरोपी नहीं था। यदि पुलिस को कार्रवाई करनी ही थी तो मुख्य आरोपियों के खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने गाजीपुर पुलिस और पुलिस अधीक्षक को चुनौती देते हुए कहा कि यदि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष और सही है तो मामले के अन्य मुख्य आरोपियों के खिलाफ भी समान कार्रवाई कर दिखाएं।

उन्होंने कहा कि मृतक कमलेश बिंद की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके पति को पहले थाने में प्रताड़ित किया गया और बाद में एनकाउंटर कर दिया गया। ऐसे आरोपों के बाद मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है। पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ।

मंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था प्रत्येक आरोपी को अदालत में आत्मसमर्पण करने का अवसर देती है, लेकिन वर्तमान में पुलिस की कार्यप्रणाली कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि प्रशासन को विरोध प्रदर्शन की आशंका थी तो स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) ने पहले से इसकी सूचना क्यों नहीं दी और शव ले जाने के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

उपद्रवियों पर रासुका लगाने की चेतावनी को लेकर डॉ. निषाद ने कहा कि यदि प्रशासन कार्रवाई करना चाहता है तो सबसे पहले उन पर रासुका लगाकर दिखाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद-बिंद समाज के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, जिसे समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।

डॉ. निषाद ने कहा कि वह पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कदम सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कायम रहना चाहिए।

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