भांवरकोल (गाजीपुर)। भांवरकोल क्षेत्र में चैती छठ पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था देखने को मिली। गाजीपुर के विभिन्न इलाकों से आए व्रतधारियों ने मंगलवार को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की। व्रती बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर चार दिवसीय छठ पर्व का समापन करेंगे।
क्षेत्र के बाठा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए। व्रतधारियों ने पूरे विधि-विधान के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
मान्यता है कि छठ पर्व वर्ष में दो बार—कार्तिक और चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथ भविष्य पुराण के अनुसार यह पर्व सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करता है। क्षेत्र के विद्वान पंडित चंदन पांडे के अनुसार छठ पर्व के माध्यम से सूर्य देव की आराधना करने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी सूर्यलोक में स्थान प्राप्त होता है और आत्मा को शांति मिलती है।
लोक आस्था का यह महापर्व कृषि से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। नई फसल के आगमन के समय किसान परिवार भगवान सूर्य और छठी मैया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनकी कृपा से घर में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।










