संवाददाता:- चंदन पांडेय भांवरकोल (गाजीपुर): पितृ पक्ष और अनंत चतुर्दशी के पवित्र अवसर पर गाजीपुर जिले के भांवरकोल क्षेत्र में पूर्वजों के प्रति गहरी श्रद्धा का अनूठा दृश्य देखने को मिला। क्षेत्र के बांठा, जगदीशपुर, कनुवान और धनेठा गांवों से सैकड़ों ग्रामीण अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति और पिंडदान के लिए बिहार स्थित पवित्र नगरी गया धाम के लिए रवाना हुए।
परंपरा के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन से ही पितृ पक्ष का आरंभ माना जाता है। इसी मान्यता के चलते इन गांवों के ग्रामीणों ने सुबह ढोल-बाजे के साथ पूरे गांव की परिक्रमा की और गांव के सिवान पर पहुंचकर अपने पूर्वजों को नमन किया। सिवान परिक्रमा के बाद हर-हर महादेव और पितर देवाय नमः के जयघोष के साथ पूरा जत्था गया के लिए मार्गस्थ हो गया। इस धार्मिक यात्रा में सुरेंद्र चौरसिया, गोपाल चौरसिया, सुदामा सिंह और सोहन गोंड सहित क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।
हिंदू धर्म शास्त्रों में गया को पितृ तीर्थ का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। गरुड़ पुराण और वायु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु स्वयं यहां विष्णुपद के रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि गया में फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान करने से 108 कुल और सात पीढ़ियों का उद्धार होता है और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान गया में ही किया था। इसी आस्था के चलते हर साल पितृ पक्ष में लाखों श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। भांवरकोल क्षेत्र से ग्रामीणों का जत्थे के रूप में गया जाना सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा को दर्शाता है।










