संवाददाता:- चंदन पांडेय गाजीपुर। भांवरकोल क्षेत्र के मसोन गांव में स्थित माँ योगमाया का मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। 21वीं सदी में बने इस मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ सच्चे मन से त्रिशूल चढ़ाने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गांव के प्रधान राजन राय, रिंकू पांडे, गोलू पांडे और राज नारायण सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस मंदिर में न केवल आसपास के क्षेत्रों से बल्कि दूर-दराज के जिलों से भी लोग अपनी मनौती लेकर आते हैं। मनोकामना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु यहाँ त्रिशूल चढ़ाकर माता का आभार व्यक्त करते है।
माँ योगमाया का धार्मिक महत्व……
माँ योगमाया को आदिशक्ति का दिव्य स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उसी समय योगमाया ने नंदराय और यशोदा के घर कन्या रूप में अवतार लिया।
जब कंस ने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, तब वह आकाश में जाकर अपने दिव्य रूप में प्रकट हुईं और कंस को चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है।
इसके बाद माँ योगमाया विभिन्न शक्तिपीठों में पूजी जाने लगीं, जिनमें विंध्याचल और कामाख्या मंदिर प्रमुख हैं।
यदुवंश की कुलदेवी…..
माँ योगमाया को यदुवंशी समाज की कुलदेवी भी माना जाता है, क्योंकि उनका जन्म नंद बाबा के यहाँ हुआ था। ब्रज क्षेत्र और यादव समाज में उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
मसोन गांव का यह मंदिर आज श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बन चुका है। नवरात्रि सहित अन्य पर्वों पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि माँ योगमाया अपने भक्तों के कष्ट हरकर उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि यह मंदिर धीरे-धीरे क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल बनता जा रहा है।










