मुहम्मदाबाद। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच विकास खंड मुहम्मदाबाद के ग्राम पंचायत कुंडेसर की तस्वीर पंचायती व्यवस्था की नाकामी, लापरवाही और इंतज़ामिया की बेपरवाही की गवाही दे रही है। गांव की गलियों में करीब डेढ़ फीट तक नाबदान और नालियों का गंदा पानी जमा है, जिससे ग्रामीणों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। हर दिन लोग उसी सड़े हुए पानी से होकर आने-जाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गड़ही (तालाब संख्या-405) की सफाई पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा। उनका कहना है कि सफाई कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार की बू साफ महसूस हो रही है, जिसका खामियाजा अब पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है।


गंदे पानी से उठती दुर्गंध, पनपते मच्छर और जहरीले कीटों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों को डर है कि यदि जल्द निकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियां गांव में कहर बरपा सकती हैं।
ग्रामीण गुड्डू यादव, लालबहादुर यादव, त्रिलोकी यादव, लछमन यादव, अखिलेश यादव और अभिषेक यादव ने बताया कि गांव की बदहाल गलियों के कारण अब रिश्तेदार भी घर आने से कतराने लगे हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर सिर्फ कागजी दावे किए जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत बेहद भयावह है।
उधर, ग्राम सचिव अजीत कुमार ने बताया कि चार-पांच महीने पहले पोकलेन मशीन से तालाब की सफाई कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन कार्य सफल नहीं हो सका। इसके बाद मनरेगा मजदूरों से भी सफाई कराने की कोशिश की गई, पर वह भी पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने दावा किया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल सवाल यह है कि जब सरकारी योजनाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब भी गांव की गलियां गंदे पानी में डूबी क्यों हैं? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और जल निकासी की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है।










