गाजीपुर। गाजीपुर में छह वर्ष की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में मेडिकोलीगल जांच में हुई गंभीर देरी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा की गई शिकायत के बाद मानवाधिकार आयोग सक्रिय हो गया है। आयोग के निर्देश पर पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई थी, जिसे अब तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
बताया जा रहा है कि मासूम दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकोलीगल परीक्षण कराने में लगभग 15 घंटे की देरी हुई थी। यह देरी मुख्य रूप से सीएमओ कार्यालय और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर खींचतान के कारण हुई। इस दौरान पीड़िता और उसके परिजनों को दो दिनों तक कभी ट्रामा सेंटर तो कभी महिला अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े, जिससे पूरे मामले में स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता सामने आई।
इस घटना से आहत होकर सामाजिक कार्यकर्ता सूर्यकांत त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से उठाते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की जांच की मांग की। उनकी शिकायत के बाद आयोग ने संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
इधर जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी ने सीएमओ से रिपोर्ट तलब की और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य आनंद कुमार मिश्रा ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक कार्यकर्ता सूर्यकांत त्रिपाठी की पहल के बाद यह मामला अब शासन और मानवाधिकार आयोग के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि पीड़िता को न्याय दिलाने और लापरवाही करने वालों पर जल्द कार्रवाई होगी।










